यूपी में मार्कशीट ऑनलाइन

                                                                             देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में जिस तरह माध्यमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक हेर-फेर का धंधा बड़े पैमाने पर चलता रहता है और उसके कारण फ़र्ज़ी मार्कशीट मिलने का सिलसिला कभी भी कम नहीं होता है तो उस परिस्थिति में यूपी सरकार द्वारा माध्यमिक शिक्षा परिषद की मार्कशीट्स को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के बारे में निर्णय करना बहुत ही सुधारात्मक कदम है क्योंकि इसके बाद इन मार्कशीटों में फर्ज़ीवाड़े को पूरी तरह से समाप्त किये जाने की तरफ कदम बढ़ाये जा सकेंगे. इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग बीस करोड़ रुपयों का खर्च आने का अनुमान है. इन बीस करोड़ रुपयों के खर्च करने के बाद कितनी श्रम शक्ति और समय की बचत होने वाली है इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि अभी तक इन अंकपत्रों को ऑनलाइन डाउनलोड तो किया जा सकता है पर इनका सत्यापन करने के लिए वही पुरानी प्रक्रिया चलती रहती है जिसमें काफी समय लगता है और किसी भी छात्र के दस्तावेज़ गुम हो जाने पर उसके पास कोई अन्य विकल्प भी शेष नहीं रह जाता है.
                                                                  आज भी यूपी में बहुत सारी कोशिशों के बाद भी शिक्षा / नकल माफिया पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लगाया जा सका है और कुछ ऐसे गिरोह भी इलाहाबाद बोर्ड तक सक्रिय हैं जो पूरी तरह से फ़र्ज़ी मार्कशीट बनवाकर उसका भौतिक सत्यापन भी करवा दिया करते हैं और जब कभी भी किसी मार्कशीट का सत्यापन होना होता है तो वे भ्रष्टाचारी फिर से पूरी जुगत लगाकर उनको पुनः सत्यापित करवा देते हैं. अब जब यह पूरी प्रक्रिया इस तरह से डिजिटलाइज़्ड हो जाएगी तो इसमें घोटाले करने की संभावनाएं आज के मुकाबले बहुत कम हो जायेंगीं तथा किसी भी आपात परिस्थिति में छात्रों को पूर्ण रूप से सत्यापित मार्कशीट कुछ देर में ही प्राप्त हो सकेगी. पूरे प्रदेश कार्यभार संभाले यूपी बोर्ड के लिए यह २० करोड़ का खर्च इस मामले में बहुत ही मामूली साबित होने वाला है क्योंकि इससे आम लोगों को सुविधा के साथ बोर्ड की कार्यकुशलता में भी गुणात्मक सुधार होने की आशा की जा सकती है और मार्कशीट्स का रियल टाइम सत्यापन भी करने में संस्थाओं को आसानी हो जाएगी.
                                                                 आज यूपी में इस तरह के बहुत से छोटे परन्तु प्रभावी ढंग से काम करने वाले बहुत सारे उपायों को अविलम्ब उठाये जाने की ज़रुरत है जिससे पूरे प्रदेश में बाबूशाही को काम किया जा सके तथा आम लोगों को इस तरह के काम स्वयं करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए. प्रारम्भ में यह कार्य नए छात्रों से शुरू किया जायेगा और धीरे धीरे आज तक हुई सभी परीक्षाओं की मार्कशीट इस प्रारूप में उपलब्ध हो जायेंगीं. करोड़ों की संख्या में मार्कशीट्स को देखते हुए यदि किसी प्रभावी एजेंसी का चयन सरकार द्वारा किया गया तो यह काम बहुत जल्दी संपन्न होने की तरफ जा सकता है केवल योजना घोषित होने के बाद उसके क्रियान्वयन पर ध्यान देने के लिए आज तक देश/प्रदेश में कोई कारगर उपाय नहीं खोज जा सका है जिसके चलते ही कई बार बहुत ही प्रभावी योजना किस तरह से बीच में दम तोड़ दिया करती हैं इसका उदाहरण यूपी की एक समय में पूर्ण सफल लोकवाणी से समझा जा सकता है जिसने गुड गवर्नेंस के एक ऐसे प्रारूप को २००५ में ही शुरू कर दिया था जिसे आज भी देश के लिए सपना ही माना जाता है पर राजनैतिक इच्छाशक्ति में कमी के चलते कुछ भी नहीं हो पाया. आशा है कि बोर्ड यह काम समयबद्ध तरीके से करते हुए समस्याओं को कम करने की तरफ जल्द ही बढ़ेगा.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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