आतंक और सुरक्षा

                                                                जम्मू-कश्मीर में भारी मतदान सदैव से ही चुनावों का बहिष्कार करने वाले अलगाववादियों और पाक में बैठे आतंकी समूहों के सरगनाओं के लिए बुरी खबर से अधिक कुछ भी नहीं है क्योंकि अभी तक २००२ से होने वाले चुनावों में जिस तरह से लगातार मतदान का प्रतिशत बढ़ता ही जा रहा था. इस बार राज्य की जनता ने पूरी तरह से पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए देश के साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाने में भी पूरी तरह से भाग लिया है वह जहाँ भारत के लिए अपने आप में बहुत ही अच्छी खबर है वहीं उससे अलगाववादियों के मंसूबे टूटते हुए नज़र आ रहे हैं. अभी तक जिस तरह से इन समूहों और आतंकी संगठनों द्वारा घाटी की जनता को जिहाद के नाम पर परेशान किया जाता रहा है तो आम लोगों द्वारा पहली बार उनके आह्वाहन को खुले तौर पर नकारने का यह पहला मामला ही सामने आया है. इस पूरी घटना से ही चिंतित आतंकी संगठनों ने एक दिन में तीन जगहों पर सेना और आम नागरिकों पर हमले कर अपनी हताशा का परिचय भी दे दिया है.
                           पाक से लगती सीमा पर कांटेदार बाद लगाने का जो काम तीन दशक पहले शुरू किया गया था अब उसके सुखद परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं क्योंकि आतंकियों के लिए अब कहीं से भी भारत में घुसना आसान नहीं रह गया है जिससे उनके दबाव में कम करने वाले या सहानुभूति रखने वाले घाटी में कम ही होते जा रहे हैं. इस तरह की परिस्थिति में अब आतंकी कुछ भी करके घाटी में अपनी उपस्थिति को ही दर्शाना चाहते हैं पर भारतीय चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को पूरी दुनिया में सराहा जाता है इसलिए घाटी के लोगों के कानून के माध्यम से सरकार बनाने की किसी भी कोशिश को इसी तरह से रोकने के लिए आतंकी कुछ भी करने के लिए तैयार दिखाई देते हैं. यदि कश्मीर घाटी में आम लोग इसी तरह से अलगाववादियों के आह्वाहन को नकारना शुरू कर देते हैं तो इससे उनको देश की लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी समस्याएं सुलझाने में बहुत मदद मिलने वाली है तथा केंद्र के साथ राज्य सरकार के सहयोग से घाटी के परिदृद्य को भी बदला जा सकता है.
                                          संसद पर आतंकी हमले की वर्षगांठ पर एक बार फिर से ख़ुफ़िया एजेंसियों ने आतंकी हमले की आशंका के चलते कड़ी सुरक्षा बनाये रखने की सलाह भी जारी की है तो इस स्थिति में आतंकियों के मंसूबे में सहयोग करने वाले आम लोगों पर नज़र रखने की बहुत आवश्यकता भी है. इस तरह के गुरिल्ला युद्ध के लिए थोड़े से प्रशिक्षण के साथ अंजाम देने की महारत दुनिया भर में सक्रिय आतंकियों के पास है और जिहाद के नाम पर युवकों को जिस तरह से मरने मारने के लिए तैयार कर लिया जाता है वह ही पूरे मामले में सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. देश के नागरिकों में से कुछ के लिए इस तरह के आतंकियों के समर्थन के प्रति सद्भावना रखने से जहाँ पूरी तरह से युवा मुस्लिम सुरक्षा बलों के निशाने पर रहा करते हैं वहीं उनके लिए पूरे देश में कम करने के अवसरों पर भी अघोषित पाबन्दी सी लग जाती है. अब हर नागरिक को अपने स्तर से ज़िम्मेदार होना ही पड़ेगा और देश के सुरक्षा बलों के लिए आँख कान का काम भी करना पड़ेगा जिससे आतंकी मसलों में हम अपने को और भी सुरक्षित महसूस कर सकें.     
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

About Dr Ashutosh Shukla

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