सीमावर्ती क्षेत्र और युवा रक्षक

                                                रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने राज्य सभा में सरकार की एक योजना में बताया जिसके तहत सीमावर्ती राज्यों के युवाओं और विद्यार्थियों को सैन्य प्रशिक्षण देने की योजना है जिससे सीमा पर के दुश्मन की असामान्य हरकतों और चालाकियों के बारे में जानने के गुण भी इन युवाओं में आ सकें जिससे समय आने पर यही युवा देश के सैनिकों के साथ स्थानीय परिस्थितियों में बेहतर तालमेल बैठाकर उनकी सहायता करने में सक्षम हो सकें. आज देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में जिस तरह की समस्याएं रहा करती हैं और सीमा पार से आतंकी गतिविधियों समेत मादक पदार्थों की तस्करी तक की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह से सेना और बीएसएफ पर ही निर्भर रहना पड़ता है उस परिस्थिति में भी कुछ बदलाव हो सकेगा. जब युवाओं में आवश्यक प्रशिक्षण के माध्यम से देश के लिए काम करने के जज़्बे को पैदा किया जा सकेगा तभी आगे चलकर इस दिशा में कुछ ठोस प्रगति हो सकती है और सीमावर्ती क्षेत्र पूरी तरह से तो नहीं पर और भी अधिक सुरक्षित हो सकते हैं.
                                                पूरे देश के युवाओं में आज भी सेना में जाने को लेकर एक ललक रहा करती है अब सरकार को उस स्थिति के लिए इन युवाओं को तैयार करने के बारे में अपनी इस योजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि जब आधारभूत ट्रेनिंग को एनसीसी के माध्यम से प्रभावी ढंग से देना शुरू कर दिया जायेगा तभी इन युवाओं में सेना के पेशेवर रवैये की जानकारी हो पायेगी. इस बात की सम्भावना अधिक हो सकती हैं कि सरकार कि इस तरह के प्रयास के बाद एनसीसी के प्रति भी विद्यालयों में रुझान बढ़ने लगे. आज भी देश के बहुत सारे विद्यालयों में यह प्रशिक्षण दिया जाता है पर इसके वैकल्पिक होने से जहाँ इसके प्रति बच्चों में झुकाव कम रहता है वहीं सेना के बारे में सही जानकारी न होने से भी युवा इस तरह कुछ भी नहीं सोच पाते हैं. अब इस सोच को बदलने की ज़रुरत है और जब तक एनसीसी को आगे के कैरियर से और भी बेहतर तरीके से नहीं जोड़ा जायेगा तब तक युवा इस तरफ कम ही आना चाहेंगें.
                                                सरकार ने जहाँ इस बात को भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस तरह की योजना केवल सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए ही है और इसे पूरे देश में अभी लागू करने के बारे में कोई विचार नहीं सामने आया है जबकि सरकार को अब इस ट्रेनिंग को पूरे देश के चुनिंदा क्षेत्रों में तेज़ी से लागू करने के बारे में सोचना चाहिए तथा एनसीसी ट्रेनिंग पाये बच्चों को राज्यों और केंद्र की पुलिस सेवा से लगाकर अन्य सेवाओं में भी अनुपातिक आरक्षण और वरीयता देने के बारे में सोचना चाहिए. यदि देश के पास हर जनपद में ऐसे कुछ सैकड़ा युवक होते हैं तो स्थानीय समस्याओं से लगाकर अन्य मसलों में भी इसकी सहायता से परिस्थितियों को बेहतर तरीके से सँभालने में मदद मिल सकती है. सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में सरकार के प्रयास पूरी तरह से स्वागत योग्य हैं और इसे परीक्षण के तौर पर लागू करने के बारे में उसे तेज़ी से आगे भी बढ़ना चाहिए. देश की सीमाओं पर दिखने वाले दुश्मन के साथ ही देश के अंदर छिपे हुए दुश्मनों से भी निपटने में यह पूरी व्यवस्था एक बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकती है.        
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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