उच्च शिक्षा और भारत

                                                                                मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि शैक्षणिक वर्ष २०११/१२ से देश में उच्च शिक्षा को लेकर जिस तरह से युवाओं में उत्साह बढ़ा है आने वाले दिनों में यह देश की पूरी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता भी रखता है. यदि इसी क्रम में यह वृद्धि जारी रही तो इस वर्ष या अगले वर्ष तक भारत २.७० करोड़ पंजीकरण के साथ इस दिशा में चीन के ३.१० करोड़ पंजीकरणों को भी बहुत पीछे छोड़ देने वाला है और देश में उच्च शिक्षित लोगों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी भी दिखाई देने वाली है. ताज़े और पहले से बेहतर आंकड़ों के अनुसार देश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले युवाओं का प्रतिशत केवल १९ तक ही पहुँच पाया है और आने वाले वर्षों में इसके और भी अधिक बढ़ने की संभावनाएं भी बलवती होती जा रही हैं. अब केंद्रीय, राज्य स्तरीय, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की संख्या लगभग ६०० के करीब पहुँच रही है जिससे माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर आगे पढ़ने वाले युवाओं के लिए कक्षाओं की उपलब्धता और विकल्प भी बढ़ते ही जा रहे हैं जिसका लाभ पूरे देश को मिलने वाला है.
                                               इस दिशा में होने वाली इस प्रगति पर ध्यान दिया जाये तो यह काम केवल कुछ दिनों में ही संपन्न नहीं हो गया है विश्व बैंक और केंद्र तथा राज्य सरकारों के निरंतर प्रयासों के बाद स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होने से उनके उच्च शिक्षित होने की आकांक्षा ने भी इस पुरे परिदृश्य को और भी लुभावना बना दिया है. पूरे देश में शिक्षा को लेकर जिस तरह से अभियान चलाया गया यह उसी का परिणाम है कि आज हमारे देश में उच्च शिक्षा की स्थिति भी लगातार सुधरती ही जा रही है. अब इस कार्य को और भी तेज़ी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि जब इस तरह से ही शिक्षा को लेकर रुझान बढ़ता रहेगा तो आने वाले समय में वैज्ञानिक सोच के साथ अनुसन्धान के क्षेत्र में भी भारतीय युवा आगे आने के बारे में सोचना शुरू कर सकेंगें. आज देश में शिक्षा के प्रसार को वैज्ञानिक सोच के साथ ही अनुसन्धान के क्षेत्र की तरफ ले जाने की बहुत आवश्यकता है जिससे देश अपनी मेधा का सही तरह से उपयोग करने में सफल हो सके.
                                           देश ने इस तरह से अपने सामने आने वाली पहली चुनौती को तो पार कर ही लिया है जिसमें बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना भी शामिल था और आज जो भी बेहतर परिदृश्य दिख रहा है उसके लिए प्राथमिक शिक्षा के महत्व को काम करके नहीं आँका जा सकता है. अब देश के विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता बढ़ने लगी है क्योंकि अभी तक इन जगहों पर विद्यार्थियों का आना ही कम था पर अब जब देश से बाधा से आगे बढ़ चुका है तो इसकी गुणवत्ता पर सोचने का समय आ गया है. देश में शिक्षा के परिदृश्य को पूरी तरह से सुधारने के लिए अभी आमूल चूल परिवर्तन करने के स्थान पर देश की आवश्यकताओं और राज्यों की स्थिति के अनुसार काम करने का समय आ गया है. उच्च शिक्षा तक पहुंचे हुए इन युवाओं को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करने की दिशा में सरकारों को सोचने की ज़रुरत है जिससे ये देश के साथ अपने सपनों को जोड़कर बेहतर भारत के निर्माण में अपना योगदान करने में सफल हो सकें.        
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

About Dr Ashutosh Shukla

Only simple.....
यह प्रविष्टि उपयोग, उम्मीद, कर्तव्य, शिक्षा, संशोधन, संसाधन, सरकार, सुधार में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s