२६/११ के छह साल

                                                २००८ की ढलती हुई शाम मुंबई को किस तरह से आतंकित करते हुए पूरे देश के साथ विश्व के लिए चिंता का सबब बन गयी थी उसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं क्योंकि जिस तरह की व्यापक तैयारी के साथ पाक नौसेना द्वारा सामरिक सहयोग पाये हुए आतंकियों के समुह ने भारत की आर्थिक राजधानी के भीड़ भाड़ वाले स्थानों को अपना निशाना बनाया था उसकी कल्पना भी नहीं की गयी थी. भारत पर आतंकियों द्वारा समुद्र मार्ग से किया गया यह अपने तरह का पहला मामला था जिसमें १६४ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और मुंबई आतंक निरोधी दस्ते के मुखिया समेत बड़ी संख्या में जवान भी हताहत हुए थे. भारत की विशाल समुद्री सीमा को देखते हुए इस तरह के हमले कर पाना वैसे तो आसान ही है पर आतंकियों ने जिस तरह से कई समूहों में बंटकर हमले को अंजाम दिया उससे यही लगता है कि उनकी तैयारियां कुछ अधिक ही थीं और वे लोगों को बंधक बनाकर सरकार को नीचा दिखाने की कोशिशें करने वाले थे पर जवानों की मुस्तैदी और आतंकियों को घेर लेने में सफलता मिलने के बाद उनका सफाया किया जा सका था.
                                                 यह सही है कि उस घटना के बाद सरकार ने समुद्री सीमा को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक कदम भी उठाये हैं और आज भी देश की सामरिक आवश्यकताओं के अनुसार उनको मज़बूत किये जाने की तरफ प्रयास जारी हैं. इस तरह की किसी भी परिस्थिति से निपटने में कोई भी सरकार भारत जैसे देश में कितना सफल हो पाती है यह पूरी तरह से सरकार और जनता की जागरूकता पर ही निर्भर करता है क्योंकि सरकार के सामने कुछ सीमायें हुआ करती हैं जिनके कारण वह हर स्थान पर निगरानी के तंत्र को व्यापक रूप से नहीं चला सकती है पर यदि इसमें जनता की जागरूकता को जोड़ दिया जाये तो आने वाले समय के साथ आज ही देश को सुरक्षित किये जाने की तरफ सही कदम उठाये जा सकते हैं. पुलिस बल की सीमा होने के कारण उससे हर तरह की अपेक्षाएं करना ही गलत है तो इस स्थिति में जनता को सहभागिता को बढाकर देश को सुरक्षित रखने के बारे में आगे बढ़ा जा सकता है.
                                          मुंबई पुलिस को आतंकियों से निपटने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाती है जिसका लाभ उठाते हुए ही उसने २६/११ को अपने व्यापक नुकसान के बाद भी ज़मीनी स्तर पर कार्यवाही करने में कोई कसर नहीं रखी थी पर उसके पास और भी व्यापक तैयारियां होनी चाहिए इससे आज कोई भी इंकार नहीं कर सकता है. पाक प्रायोजित आतंकियों के लिए सीमा पर निगरानी बढ़ जाने के बाद से घुसपैठ करना मुश्किल हो गया है और उन्होंने एक रणनीति के तहत ही भारत पर समुद्री मार्ग से हमला किया था उस हमले के माध्यम से उसने यह कोशिश की थी कि वह कहीं से भी भारत को असुरक्षित करने के लिए कदम उठाने से नहीं चूकने वाला है. आज भारत की सामरिक और आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य को बहुत अच्छा कहा जा सकता है क्योंकि हमारी निगरानी करने की क्षमता में व्यापक बढ़ोत्तरी हुई है और आने वाले समय में इसे और भी मज़बूत करने के लिए देश संकल्पित भी है. उस हमले में शहीद हुए लोगों को सम्मान करते हुए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि देश को सुरक्षित रखने में सरकार के साथ हम नागरिक भी अपने सभी प्रयासों को करने में पीछे नहीं हटने वाले हैं.      
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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