एलपीजी में डीबीटीएल

                                                                                  केंद्र सरकार ने एक बार फिर से घरेलू गैस की कालाबाज़ारी और दुरूपयोग को रोकने की कोशिश करते हुए सब्सिडी की राशि को सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में भेजने की पायलट योजना आज से शुरू कर दी है फिलहाल देश के ११ राज्यों के ५४ शहरों में इसका फिर से शुभारम्भ किया जा रहा है. देश की व्यापकता और घरेलू गैस के दुरूपयोग पर रोक लगाने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय पिछले दो-तीन वर्षों से कारगर योजना बनाने में जुटा हुआ है. इस क्रम में पहली १ जून २०१३ से २९१ शहरों में इस योजना को लागू किया गया था पर शुरुवाती परेशानियों के बाद इसे वापस ले लिए गया था तभी से पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी इस बारे में माथापच्ची करने में लगे हुए थे. आधार को लेकर कानूनी पचड़े और उसके बाद मई में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं के चलते पिछले वर्ष से ही अधिकारियों ने इस योजना पर भाजपा का विरोध देखते हुए इसे ठन्डे बस्ते में डालने का काम शुरू कर दिया था.
                                          सत्ता सँभालने के बाद जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी ने जहाँ के तरफ आधार को पूरा समर्थन और उसके माध्यम से केंद्रीय योजनाओं को लागू करने की संप्रग सरकार की परियोजनाओं में तेज़ी लाने की मंशा दिखाई तो पेट्रोलियम मंत्रालय भी इस बारे में सक्रिय हो गया चूंकि उसके पास पिछले बार की कमियां भी सामने थीं तो उसने बहुत ही आसानी से उन कमियों को दूर करते हुए इस योजना को नए सिरे से लागू करने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं. अभी जिन ज़िलों में यह काम शुरू किया जा रहा है वहां सरकार केवल २० रूपये प्रति किलो के हिसाब सब्सिडी देने के बारे में निर्णय ले चुकी है और बाकी की सब्सिडी देने का ज़िम्मा कम्पनियों पर छोड़ दिया गया है. सरकार ने सब्सिडी निर्धारित करने की प्रक्रिया को भी वर्ष में दो बार समीक्षा के घेरे में ले लिया है और अगली समीक्षा मार्च २०१५ में की जानी है.
                                          सरकार की अच्छी योजनाओं को बैंकों, ग्राहकों और गैस एजेंसियों के बीच के अच्छे समन्वय के माध्यम से ही पूरी सफलता के साथ लागू किया जा सकता है. अभी आधार से जुड़े बैंक खातों के बारे में जिस तरह से सरकार के प्रयास शुरू हुए हैं यदि यह कार्य आगे बढ़ता है तो आने वाले समय में सब्सिडी के दुरूपयोग को पूरी तरह से रोकने में सफलता भले ही न मिल पाये पर उसे काफी हद तक कम तो किया ही जा सकता है. पहले चरण में इसकी सफलता और कमियों की समीक्षा के बाद फिर से आगे के क़दमों पर विचार किया जा सकता है जिससे यह योजना अपनी गति को पकड़ सके. जन-धन योजना को लेकर आज भी बैंक और आम जन स्पष्ट नहीं है और जिस तरह से सही जानकारी के अभाव में योजनाएं पूरा लाभ नहीं दे पाती हैं अब उन पर भी अंकुश लगाये जाने की आवश्यकता है. फिलहाल एक अच्छे कदम की शुरुवात तो हो चुकी है और अब इसको सही दिशा में ले जाने का काम बैंक, गैस एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को भी करना ही होगा तभी देश आगे बढ़ सकेगा.     
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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