कुशीनगर की घटना

                                                      कुशीनगर में मोहर्रम के जुलुस में शामिल युवाओं द्वार जिस तरह से पाकिस्तानी क्रिकेट टीम जैसी जर्सी पहन कर मातम किया गया उसके बाद स्थानीय राजनीति के साथ ही राज्य भर में इस बात पर बहस के साथ विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने का सिलसिला शुरू हो चुका है. मोहर्रम के जुलुस को इस तरह से विवादों में लाये जाने के लिए इन युवाओं का समर्थन किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता है और जब पूर्वी यूपी में इस तरह के मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता का स्तर बहुत अधिक है तो इन युवकों द्वारा किया जाना वाला यह काम जानबूझकर किया जाने वाला दुस्साहस ही अधिक लगता है. किसी भी देश के समर्थन में उसकी टीम जैसी जर्सी पहनना कोई बड़ी बात नहीं है पर भारत के खिलाफ साज़िशों में लगे हुए पाकिस्तान की जर्सी जब एक धार्मिक कार्यक्रम में मुसलमान युवकों द्वारा पहनी जाती है तो उस पर कड़ी प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही है. इन चंद युवकों के इस कारनामे के चलते पूर्वी यूपी के जिलों में अब राजनीति शुरू हो चुकी है.
                                                     भारत के साथ पाक के रिश्ते कभी भी ठीक नहीं रहे हैं और इस तरह की परिस्थिति में पाक जर्सी पहनना किस तरह की स्थिति को उत्पन्न कर सकता है यह दिखाई दे रहा है. इन युवकों ने इन जर्सियों की व्यवस्था कहाँ से की और इस तरह के प्रदर्शन में उनकी मंशा क्या थी इस बात पर भी विचार किये जाने की आवश्यकता है क्या इन युवकों की इस तरह की हरकतों से स्थानीय माहौल ख़राब नहीं हुआ है और अब इन युवकों पर राष्ट्रद्रोह जैसे मुक़दमों में कार्यवाही किये जाने की मांग भी उठने लगी है. पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा १५३ बी के तहत १० अज्ञात लोगों के खिलाफ मुक़दमा भी दर्ज़ कर लिया है पर इस मामले में पुलिस ने भी राजनीति किये जाने के रास्तों को खुला छोड़ दिया है क्योंकि जब खुद पुलिस ने वहां जाकर जर्सी उतरवाई थी तो फिर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज़ करना आखिर मामले को और आगे बढ़ाने जैसा नहीं है ?
                                                   इस तरह के सोचे समझे काम से सही तरह से कानूनी ढंग से त्वरित रूप से निपटना चाहिए क्योंकि पुलिस द्वारा कार्यवाही कर देने के पश्चात इसमें राजनीति को घुसेड़ने की सभी कोशिशें समाप्त हो जाती और मामला शांत हो जाता पर अब पुलिस को दबाव में लेने की कोशिशें भी की जायेंगीं. इस तरह की घटनाओं से राज्य सरकार पर भी आवश्यक दबाव बनता है और विपक्षियों को निशाना साधने का अवसर भी मिल जाता है लोकसभा चुनावों में हार के बाद से अखिलेश सरकार का अस्तित्व प्रदेश में जिस तरह से वापस दिखाई देने लगा है इस तरह की घटनाएँ उन पर भी पानी फेर देती हैं क्योंकि जो विकास के काम हो रहे हैं वे इस तरह के माहौल में कहीं छिप जाते हैं और संकीर्णता फ़ैलाने वाले चाहे वे जर्सी पहने हों या फिर उनका विरोध करने वाले हों उनके पास काफी काम आ जाता है और समाज में अनावश्यक रूप से कटुता भी बढ़ती है. अखिलेश सरकार को इस तरह के किसी भी मामले से सख्ती से निपटना चाहिए क्योंकि एक बार छूट मिल जाने पर इसकी पुनरावृत्ति भी हो सकती है.        
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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