सुप्रीम कोर्ट और काला धन

                                                             काले धन पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो दिन पहले फटकार लगायी थी उसके बाद यह लगने लगा था कि इस मामला का हश्र भी कोयला आवंटन जैसा होने वाला है जिसमें सरकार की कोशिशों के बाद भी कुछ ब्लॉक्स छोड़कर सभी के आवंटन को रद्द कर दिया गया था और लगभग इसी तरह का रुख सुप्रीम कोर्ट ने २ जी मामले में भी अपनाया था जिसके बाद १२२ सर्किलों में स्पेक्ट्रम का आवंटन रद्द किया गया था. काले धन मामले में अभी तक कोर्ट ने जिस तरह से सरकार पर अंकुश लगाने का काम किया था उसे देखते हुए संभवतः उसे सरकार की मंशा पर कुछ संदेह हुआ होगा क्योंकि सरकार बार बार यह कह रही थी कि उसने सूचना में मिले सारे नाम एसआईटी को सौंप दिए हैं पर कोसर्ट ने इस बात पर अधिक ज़ोर दिया कि सरकार उन नामों को सील बंद लिफाफे में कोर्ट में प्रस्तुत करे जिससे मामले को आगे बढ़ाया जा सके.
                                                           कोर्ट की नाराज़गी के बाद ऐसा लगने लगा था कि कोर्ट में सरकार द्वारा दी जाने वाली सूची अब गोपनीय नहीं रह जाएगी इसलिए सरकार की तरफ से कहा जा रहा था कि इस मामले में विदेशों से जो सन्धियां की गयी हैं उन पर उर असर पड़ सकता है पर कोर्ट ने इस मामले में सरकार की कोई बात नहीं सुनी और स्पष्ट कर दिया था कि सरकार को उन संधियों की चिंता करने की ज़रुरत नहीं है और सूची कोर्ट में आने के बाद ही यह तय किया जायेगा कि उसका क्या करना है. सरकार को यहाँ पर कोर्ट पर संदेह हो रहा था कि कहीं यह सूची सार्वजनिक हो गयी तो इससे काले धन के पूरे मामले पर सही बात कभी भी पता नहीं चल पायेगी पर कोर्ट ने यह सूची एसआईटी को सौंप दी. कोर्ट ने यह काम सिर्फ इसलिए ही तो नहीं किया कि उसे कहीं से इस बात का अंदेशा हो गया कि सरकार सूची में शामिल नामों को अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए उपयोग में लाना चाहती है क्योंकि वित्त मंत्री जिस तरह से विपक्षी दल को शर्मिंदगी उठाने की बातें कहने लगे थे तो इसमें भी राजनीति का समावेश तो हो ही गया था.
                                                          अब इस सूची को कोर्ट के माध्यम से दोबारा एसआईटी को सौंपे जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार के पास इस बात के विकल्प खत्म हो गए हैं कि वह अपनी सीमाओं का अतिक्रमण कर रिपोर्ट का राजनैतिक दुरूपयोग कर सके. यह मामला जिस तरह से आगे बढ़ रह है और इसकी कानूनी पेचीदगियों के चलते जो धीमी गति ही रहने वाली है उसे भी देखते हुए देश में कुछ भी वापस लौटने की सम्भावना नहीं है क्योंकि जिन भारतीय नागरिकों का धन वहाँ पर जमा था या है वे इसे हटाने की कोशिशें भी शुरू कर चुके होंगें तथा प्रवासी भारतीयों पर यह कानून लागू नहीं होते हैं. इस मामले को तेज़ी से सुनवाई तक पहुंचा कर इस मुद्दे को खत्म किया जाना बहुत आवश्यक है क्योंकि यह अपने आप में बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ गया है तथा इसको सही परिणिति तक पहुंचना भी चाहिए जिससे आने वाले समय में कानून को मज़बूत कर काले धन पर अंकुश लगाने की कोशिशों को सही दिशा देने में सफलता मिल सके.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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