सहयोग की सामाजिक राजनीति

                                                                                    देश के कई समाचार पत्रों ने उत्तराखंड सरकार के आह्वाहन पर योगगुरु स्वामी रामदेव के बाबा केदारनाथ मंदिर पुनरुद्धार के समीक्षा कार्यक्रम और पूजन में शामिल होने की खबर को इस तरह से छापा जैसे दोनों का मिलना कोई बहुत बड़ी घटना हो. इन अख़बारों को यह लगता था कि जिस तरह से स्वामी रामदेव ने पिछले आम चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ खुलेआम बगावत का झंडा उठाते हुए मोदी को पीएम बनाने के लिए पूरे देश का भ्रमण किया था उसके बाद किसी भी कांग्रेसी नेता या सरकार के साथ उनके सम्बन्ध सामान्य नहीं हो सकते हैं पर उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत ने जिस तरह से दोनों तरफ की जमी हुई बर्फ को पिघलाने का काम किया है वह उत्तराखंड समेत पूरे देश के लिए अच्छा ही है क्योंकि सरकारों का किसी भी सामाजिक रूप से सक्रिय संगठन और उसके संचालकों से अनावश्यक संघर्ष केवल ज़मीनी स्तर पर आम लोगों के लिए नुकसान देह साबित होता है.
                                                                  आज योगगुरु की पहचान भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है क्योंकि उनके योग के प्रचार प्रसार के लिए किये जा रहे सार्थक प्रयासों से बहुत लोगो को लाभ पहुँच रहा हैं और वे स्वस्थ जीवन शैली अपनाने में सफल हो पा रहे हैं. यदि उनके विस्तार कार्यक्रमों को सरकार चला रहे रहे दलों द्वारा कानून सम्मत सहयोग दिया जाता रहे तो वे आने वाले समय में सामाजिक स्तर पर परिवर्तन लाने में सफल हो सकते हैं. सरकार की कुछ सीमायें हुआ करती हैं यह बात योगगुरु को भी समझनी चाहिए और उन्हें भी अनावश्यक रूप से किसी भी सरकार से आर्थिक और कानूनी मुद्दों पर संघर्ष का रास्ता अपनाने से बचना चाहिए. देश के कुछ कानून ऐसे भी हैं कि जिन्हें किसी भी सूरत में मानकों के अनुसार पूरा नहीं किया जा सकता है तो उस स्थिति में औषधि का व्यापार करने वाले योगगुरु के लिए कानूनी शिकंजे में आने के बहुत सारे छिपे मार्ग सदैव ही खुले रहने वाले हैं.
                                                                हरीश रावत कांगेस के उन नेताओं में से हैं जो ज़मीनी हकीकत को अच्छी तरह से समझते हैं और उसके अनुरूप अपने को ढालने के प्रयास भी किया करते हैं. उत्तराखंड में उनके सीएम बनने से जहाँ लोगों तक सरकार की पहुँच आसान हुई है वहीं वे राज्य बनने के समय से ही लंबित मुद्दों पर निर्णय करने के लिए संकल्पित भी लगते हैं. गैरसैण में राज्य की स्थायी राजधानी बनाने की दिशा में उनके क़दमों की सराहना शुरू हो चुकी है और आने वाले समय के लिए वे खुद चोट खाने के बाद भी आगे बढ़कर सरकार का नेतृत्व करने में लगे हुए हैं. इस तरह से यथार्थ को समझने वाले नेताओं के सत्ता सँभालने से सरकार की पहुँच समाज के निचले स्तर तक हो जाती है और वह आसानी से अपना काम करने की दिशा में बढ़ सकती है. सामाजिक कार्यों को सम्पादित करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ राज्य सरकारों का बेहतर समन्वय देश को आगे बढ़ाने का काम करता है और उत्तराखंड की सरकार तथा योगगुरु ने जिस तरह से एक दूसरे पर फिर से विश्वास करने की दिशा में बढ़ना शुरू किया वह देश के लिए ही अच्छा है.     
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

About Dr Ashutosh Shukla

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