काले धन की काली राजनीति

                                                                देश में काले धन को लेकर जिस तरह से सदैव ही राजनीति की जाती रही है अब उसमें बयानबाज़ी का नया आयाम भी जुड़ चुका है अभी तक काले धन के मामले में किसी भी दल के प्रयास रंग लाते नहीं दिख रहे हैं पर जब से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया था तभी से कुछ आशा जगी है कि भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून के दायरों के बाहर जाकर जमा किये गए धन के बारे में अब कुछ निर्णायक दौर भी शुरू हो सकता है. स्विस बैंक जिस तरह से काले धन के लिए जाने और बदनाम किये जाते हैं वह उनके व्यापार का हिस्सा है पर ऐसा भी नहीं है कि वहां पर भारतीयों का जो भी धन जमा है वह सब काला धन ही है. कानून के अनुसार वहां पर किसी भी व्यक्ति के धन को यदि सम्बंधित देश के आयकर और अन्य कानूनों से जुड़े पहलुओं को अनदेखा कर जमा किया है तो भारत सरकार अपने यहाँ इस तरह के मामलों में मुक़दमे दर्ज़ कर उनके नाम सार्वजनिक कर सकती है अन्यथा इससे बैंक और देशों की गोपनीयता का उल्लंघन होता है.
                                                                 सबसे पहले इस मामले में २०११ में भारत सरकार ने पहल करते हुए कई देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं शुरू की थीं जिसके बाद ही इस तरह के नतीजे पर पहुंचा गया कि अब स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की बात साबित होने पर उन लोगों के खिलाफ मुक़दमे दर्ज़ किये जा सकते हैं जिन्होंने उनका उल्लंघन किया है. यह सिर्फ कानूनी पहलू है और इस मामले की जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निगरानी भी की जा रही है तो इसमें किसी भी दल के नेता को अनावश्यक बयानबाज़ी करने से बचना भी चाहिए. इस कानूनी मज़बूरी को विपक्ष में रहते हुए भाजपा सरकार सरकार द्वारा दोषियों को बचाने के आरोप लगाया करती थी जबकि उसे भी वस्तुस्थिति का पता था पर वे बयान कहीं न कहीं उसे राजनैतिक बढ़त दिलवाया करते थे इसलिए कभी भी उस पर कोई रोक लगाने के प्रयास नहीं किये गए और आज उसे भी उसी तरह के कानून के चलते सीमित कदम उठाने को मज़बूर होना पड़ रहा है.
                                                               वित्त मंत्री के रूप में जेटली का यह कहना कि नामों के खुलासे से उनके विपक्षी दल को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा किस संकेत को दर्शाता है क्योंकि यदि किसी भी बड़े या छोटे नेता का नाम इसमें शामिल है तो सरकार को भी इस तरह के बयानों से परहेज़ करना चाहिए. यदि कोई ऐसा व्यक्ति है तो वह आने वाले समय की आहट पाकर देश को छोड़कर भी जा सकता है ? सरकार को बिना किसी बयानबाज़ी के कानूनी मसले को जल्दी से निपटना चाहिए और जो भी दोषी साबित हो उसके खिलाफ पूरी सक्रियता से न केवल मुक़दमा चलाना चाहिए बल्कि काले धन से निपटने के लिए एक विशेष कानून बनाकर दोषियों को त्वरित रूप से दण्डित करने का प्रावधान भी किया जाना चाहिए क्योंकि यदि बाद में कानून बनाया जाता है तो उससे इन मुक़दमों को कहीं न कहीं कोई कानूनी सुरक्षा भी मिल सकती है और दोषी लम्बे समय तक अपनी मनमानी करते रह सकते है. कांग्रेस की तरफ जेटली द्वारा ऊँगली उठाये जाने के बाद पार्टी को भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि जिस किसी भी व्यक्ति के खिलाफ गैरकानूनी रूप से धन जमा करने का मुक़दमा दर्ज़ किया जायेगा उसका पार्टी में कोई भविष्य नहीं रह जायेगा.   
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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