नेविगेशन आकाश में भारतीय पहुँच

                                                                 अप्रैल २०१० में भारत द्वारा इस बात की घोषणा के बाद कि शीघ्र ही देश के पास भी अपना नेविगेशन सिस्टम होगा इसरो द्वारा इस दिशा में पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया गया था और कल जिस तरह से इस श्रेणी के तीसरे महत्वपूर्ण उपग्रह को उसकी कक्षा में स्थापित करने में देश को सफलता मिली है उससे यही लगता है कि आने वाले वर्ष में ही देश के पास अपना प्रभावी और देश की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले एक बेहतर तंत्र विकसित ही जायेगा. अभी तक अमेरिका, रूस, यूरोप चीन के पास अपना नेविगेशन सिस्टम है जिसमें चीन और यूरोप अपने सिस्टम को क्षेत्र विशेष से निकाल कर पूरी दुनिया के लिए बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं जबकि जापान द्वारा भी इसी तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. भारत में एक वर्ग ऐसा भी है जो हर बड़ी वैज्ञानिक पहल को भुखमरी और गरीबी के साथ विकास से जोड़ने से बाज़ नहीं आता है जबकि आने वाले समय में वैज्ञानिक आधार पर देशों की मज़बूती उनकी वैश्विक स्थिति को प्रदर्शित करने वाली है.
                                         तकनीकी आधार पर यदि देखा जाये तो भारत में अमेरिकी जीपीएस सिस्टम का उपयोग लगभग सभी स्मार्ट फ़ोन धारक निशुल्क कर अपनी भौगोलिक स्थिति का सही अंदाज़ा लगाने के लिए कर सकते हैं और इसका उपयोग करने के लिए आज के समय में किसी भी तरह का भुगतान भी नहीं करना पड़ता है. शांति के समय जब विकास और दुनिया को साथ लेकर चलने की लम्बी चौड़ी बातें की जाती हैं तो इस अमेरिकी तंत्र के उपयोग से किसी को कोई समस्या नहीं आने वाली है पर आने वाले समय में किसी ऐसी परिस्थिति का सामना करने पर जब देश के हित अमेरिका या इस तरह के परिवहन तंत्र को संचालित करने वाले किसी भी देश के साथ टकराने की स्थिति में हुए तो उन देशों की प्रतिक्रिया को आसानी से समझा जा सकता है क्योंकि तब वे मानवीय मूल्यों के स्थान पर अपने देश के हितों की बात ही करते नज़र आयेंगें. भारत में इस तरह की किसी भी असामान्य परिस्थिति का सामना करने के लिए ही भारतीय नेविगेशन प्रणाली गगन की शुरुवात की गयी है.
                                          आज हमारे पीएसलवी उपग्रह यानों की कामयाबी पूरे विश्व के लिए किसी बड़े आश्चर्य से कम नहीं है तो उस स्थिति में देश को रणनीतिक रूप से मज़बूत करने के लिए अंतरिक्ष में जो कुछ भी किया जाना आवश्यक है उसे अविलम्ब शुरू करने की आवश्यकता है. अच्छी बात यह है कि देश की सरकारों ने इसरो के हर महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी है जिसे चलते ही हमारे वैज्ञानिक इतनी आसानी से देश को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने में लगे हुए हैं. देश के लिए जो कुछ भी आवश्यक है उस पर देश पहले से ही एकमत है और संसाधनों के विकास के लिए जो कुछ भी किया जाना आवश्यक है उस पर भी ध्यान देने की प्रक्रिया सतत रूप से चल ही रही है. देश की वैज्ञानिक सोच और उपलब्धियों को इसी तरह से गति देने का काम लगातार होना चाहिए जिससे हमारा यह नया सिस्टम किसी भी विपरीत परिस्थिति में भी हमारी सेना, संचार तथा नागरिक प्रशासन को किसी भी तरह की तकनीकी कमी न महसूस होने दे.                           
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

About Dr Ashutosh Shukla

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