इंडियन सुपर लीग

                                                             क्रिकेट के दीवाने देश में अब जिस तरह से कबड्डी के बाद फुटबॉल को लेकर भी सनसनी दिखाई दे रही है वह आने वाले दिनों में देश में खेले जाने वाले खेलों के लिए एक अच्छी खबर है. १९८३ में भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा विश्व कप जीतने के बाद से देश में क्रिकेट को लेकर जो दीवानगी बढ़ी उसके कारण ही कभी हॉकी में सिरमौर रहे इस देश में अन्य खेलों को पूछने वाला कोई और रहा ही नहीं. टीम के रूप में खेले जाने वाले खेल क्रिकेट के अलावा हमारे सभी टीम आधारित खेलों में देश का प्रदर्शन रोज़ ही गिरता चला गया जिसका असर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आयोजनों में देश के प्रदर्शन से ही जाना जा सकता है. पिछले तीन दशकों से अभी तक देश ने केवल क्रिकेट ही खेला और जिया है बीच बीच में व्यक्तिगत प्रदर्शन के दम पर कुछ खिलाडियों ने ओलम्पिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में देश की इज़्ज़त काफी हद तक बचाये रखी थी जिससे हम इन प्रतियगिताओं में भी कुछ हासिल कर लिया करते थे.
                                                             कबड्डी लीग के शुरू होने और उसमें पहली बार में सफलता और लोकप्रियता के आयाम जुड़ने के बाद से ही यह स्पष्ट होने लगे था कि अब भारत में अन्य खेलों के बारे में भी जागरूकता बढ़ाने का समय आ गया है. कभी फ़ुटबाल के लिए दीवाने रहे पूर्वी क्षेत्र और विशेषकर कोलकाता से इंडियन सुपर लीग की जो भव्य शुरुवात हुई है वह आने वाले समय में देश में फुटबॉल को लेकर भी नयी सोच पैदा करने वाली है. अभी तक सरकारी स्तर पर जिस तरह से इन खेलों के साथ औचारिकता ही निभायी जाती थी अब इनके उससे बाहर निकलने का समय भी आ गया है क्योंकि जब तक क्रिकेट के मुकाबले इन खेलों में पैसे नहीं दिखाई देंगें तब तक युवाओं में इसे अपने करियर के रूप में अपनाने में बड़ी अड़चने सामने आने वाली हैं. क्रिकेट में जिस तरह से अब एक स्थायित्व आ रहा है तो १२५ करोड़ की आबादी वाले देश के युवाओं के सामने खेलों में कोई अन्य विकल्प होना एक शुभ संकेत भी है.
                                                             कोलकाता समेत देश के पूर्वोत्तर राज्यों में आज भी फुटबॉल को लेकर दीवानगी देखी जा सकती है अब समय आ गया है कि इस लीग के माध्यम से देश के युवाओं के मन में क्रिकेट के अलावा फुटबॉल खेलने के लिए भी जागरूकता पैदा की जा सकती है. अब देश के बड़े खिलाड़ियों और नामी कम्पनियों द्वारा इस लीग में टीम खरीदने से जहाँ खिलाड़ियों को उचित आर्थिक सुरक्षा मिलेगी वहीं उनके लिए खेल के बेहतर संसाधन भी उपलब्ध हो पायेंगें. किसी भी खेल में यदि निचले स्तर से ही प्रतिस्पर्धा को शुरू करने में देश को सफलता मिलने लगी तो आने वाले समय में इन टीम आधारित खेलों में भी देश का प्रदर्शन बहुत अच्छा हो जायेगा. सरकारी खेल विभागों को अपने स्तर पर कोशिशें जारी रखनी चाहिए क्योंकि जब तक दोनों क्षेत्रों में समन्वय नहीं होगा तब तक राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर टीम के चयन को भी सुगम नहीं बनाया जा सकेगा. साथ ही जिन खिलाड़ियों का देश की टीम में चयन नहीं हो पायेगा वे भी लीग की इन टीमों से जुड़े होने के कारण आर्थिक रूप से अपने को सुरक्षित भी महसूस कर सकेंगें.      
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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