पीएम और सीधा संवाद

                                                                    शिक्षक दिवस पर बच्चों के साथ सीधे संपर्क करने के कार्यक्रम से आगे बढ़ते हुए पीएम ने जिस तरह से रेडियो जैसे पुराने और प्रभावी माध्यम को आज के युग में जनता तक पहुँचने का अगला साधन बनाने के बारे में जनता से राय मांगी है वह अपने आप में बहुत सही पहल है और आने वाले समय में माय गवर्नमेंट पोर्टल पर पीएमओ ने लोगों से इस मुद्दे पर अपनी राय भी मांगी है. आज तक देश की जनता के पास ऐसे कोई भी साधन नहीं उपलब्ध नहीं थे जिनके माध्यम से वह अपनी बात को पीएम तक पहुंचा सके और संभवतः नौकरशाही भी यह सिर्फ इसलिए नहीं चाहती थी कि जनता की पहुँच यदि सीधे देश एक सबसे बड़े और प्रभावी व्यक्ति तक हो गयी तो उससे वे किस तरह से निपट पायेंगें ? नौकरशाहों के माध्यम से जनता पर राज करने की परंपरा में नेता आम लोगों से कट से जाते हैं क्योंकि उनको इस तरह से प्रदार्शित किया जाता है जैसे उन तक पहुंचना अपने आप में दुर्लभ ही है.
                                                                    देश के पीएम का जनता से सीधा संवाद आने वाले समय में बहुत सुखद परिणाम भी दे सकता है यदि उसे सही दिशा में चलाया जा सके और उनकी मॉनिटरिंग भी होती रहे. बेशक पीएम इस मसले पर बहुत ध्यान दे रहे हैं पर उनकी अन्य पद से जुडी हुई व्यस्तताओं के चलते जिस तरह से उनका हर जगह समय दे पाना संभव नहीं है तो उस स्थिति के लिए जनता को कुछ ऐसा मंच भी मिलना चाहिए जिससे वह अपनी समस्या और क्षेत्र विशेष की समस्याओं को सीधे पीएम के साथ पूरे देश के संज्ञान में ला सके. आज भी केंद्रीय स्तर पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसके द्वारा लोगों की आम शिकायतों को सुलझाया जा सके. पीएम के संवाद को और भी प्रभावी बनाने के लिए हर जनपद की एनआईसी शाखा को यह निर्देश जारी किये जा सकते हैं कि वे अपने यहाँ समस्या, शिकायत और सुझाव के लिए एक अलग पन्ना शुरू करें जिससे स्थानीय समस्याओं के बारे में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी जान सकें.
                                                                     इस तरह के माध्यम से काम शुरू करने के लिए पीएमओ को कुछ इस तरह की पहल भी करनी चाहिए जिसके अंतर्गत लोगों से संवाद के साथ ही उनकी शिकायतों पर अचानक से चुने गए किसी नागरिक से पीएम की सीधे बात भी करायी जाये और वे स्वयं समस्या के बारे में जाने का प्रयास करें. इससे जहाँ राज्य सरकारों और जिला प्रशासन पर इस बात के लिए दबाव बन जायेगा कि वे पूरी तैयारी के साथ उपलब्ध रहें वहीं जन संवाद ख़त्म होने के बाद पीएम खुद जिलाधिकारी से मामले में पहल करने के बारे में जान सकते हैं. इस तरह कि पूरी कवायद को यदि पार्टीगत राजनीति से अलग रखा जा सके तो ही इसके परिणाम भी दिखाई दे सकते हैं वरना इसे भी केंद्र द्वारा राज्यों के अधिकारों में अतिक्रमण के रूप में लिया जा सकता है और मुद्दों से अलग हुआ जा सकता है. आज केन्द्र को इस तरफ भी सोचने की आवश्यकता है क्योंकि यदि एक अच्छे काम में पार्टी की राजनीति शामिल हो गयी तो वह कार्यक्रम अपनी उतनी स्वीकार्यता नहीं बना सकता है जो उसके लिए अपेक्षित है.          
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है…

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